सुरेश देशवाल महासचिव, किसान चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स
भारत का केंद्रीय बजट 2024 शिक्षा, रोजगार, कौशल और मध्यम वर्ग को लक्षित करने वाले उपायों का परिचय देता है। नौ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है और पूंजीगत लाभ कर व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव पेश किए गए हैं। लगातार तीसरी नरेंद्र मोदी सरकार ‘मोदी 3.0’ ने जून में आम चुनाव के समापन के बाद अपना कार्यकाल शुरू किया। 23 जुलाई, 2024 को ‘मोदी 3.0’ एनडीए सरकार का पहला केंद्रीय बजट पेश करते हुए, भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2024 के इन विषयों पर जोर दिया: शिक्षा, रोजगार, कौशल और उद्योग 4.0, और मध्यम वर्ग।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय बजट 2024-25 की सराहना की और कहा कि विकसित भारत का बजट समावेशी विकास सुनिश्चित करता है, समाज के हर वर्ग को लाभ पहुंचाता है और विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करता है। “यह देश के गरीब, गांव और किसान को समृद्धि के रास्ते पर ले जाता है। पिछले 10 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आये हैं. यह नये मध्यम वर्ग के सशक्तिकरण की निरंतरता का बजट है।”
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र
वित्त मंत्री सीतारमण ने अपने भाषण में कहा, हमारी सरकार उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु प्रतिरोधी किस्मों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कृषि अनुसंधान सेटअप की व्यापक समीक्षा करेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए ₹1.52 लाख करोड़ आवंटित किए। यह कहते हुए कि कृषि सरकार का एक प्रमुख एजेंडा है, उन्होंने कहा कि नीतियां बनाते समय उत्पादकता और लचीलेपन को ध्यान में रखा जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि अगले दो साल में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा और सरकार सर्टिफिकेशन और ब्रांडिंग के मामले में उनका समर्थन करेगी. परियोजना को वैज्ञानिक संस्थानों और इच्छुक ग्राम पंचायतों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा, जिसके लिए 10,000 आवश्यकता-आधारित जैव-इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। जलवायु अनुकूल बीज विकसित करने के लिए शोध की व्यापक समीक्षा भी होगी। 100-दिवसीय कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, 32 क्षेत्रीय और बागवानी फसलों में 109 नई बीज किस्में जल्द ही जारी की जाएंगी। चालू वित्त वर्ष में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के लिए 1.32 लाख करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है जो गत वर्ष 1.25 लाख करोड़ रुपये था। इस प्रकार कृषि मंत्रालय के बजट में 5.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। केन्द्रीय बजट में घोषित नौ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से कृषि क्षेत्र में उत्पादन और लचीलापन पहली प्राथमिकता है। बजट 2024-25 में कृषि और उससे संबंधित क्षेत्रों के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने ‘अन्नदाता’ (किसान) को 4 प्रमुख जातियों में से एक बताया और कहा कि इन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी प्रमुख फसलों के लिए एक महीने पहले उच्च न्यूनतम समर्थन मूल्यों की घोषणा की है। यह लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत मार्जिन के वायदे के अनुरूप है। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले पांच के लिए बढ़ा दिया गया है जिससे 80 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिल रहा है।
बजट 2024 का क्षेत्रवार आवंटन
रक्षा: 6,21,940 करोड़
ग्रामीण: 2,65,808 करोड़
कृषि: 1,51,851 करोड़ गृह मामले: 1,50,983 करोड़
स्वास्थ्य: 89,287 करोड़
शिक्षा: 1,25,638 करोड़
ऊर्जा: 68,769 करोड़
आईटी और दूरसंचार: 1,16,342 करोड़
वाणिज्य एवं उद्योग: 47,559 सामाजिक कल्याण: 56,501 करोड़
किसान चैंबर ऑफ कॉमर्स इस लेख में कृषि की प्रमुख घोषणाओं पर चर्चा की । वित्त मंत्री ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 1.52 ट्रिलियन रुपये (18.16 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के बजट आवंटन की घोषणा की है। पिछले साल 1.25 लाख रुपये और अंतरिम बजट में 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। मतलब इस बार 21.6 फीसदी यानी 25 हजार करोड़ रुपये बढ़ाया गया है।
कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और लचीलापन लाने के लिए केन्द्रीय बजट 2024-25 में कई उपायों की घोषणा की गई है जिसमें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, तिलहन के लिए ‘आत्मनिर्भरता’, बड़े पैमाने पर सब्जी उत्पादन केन्द्रों की स्थापना और झींगा ब्रूड-स्टॉक्स के लिए न्यूक्लियस ब्रीडिंग केन्द्रों का नेटवर्क स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता शामिल हैं।
कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसरंचना
प्रायोगिक परियोजना की सफलता से उत्साहित होकर, सरकार 3 वर्षों में किसानों और उनकी जमीन को शामिल करने के उद्देश्य से राज्यों के साथ मिलकर कृषि में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) को लागू करने में सहायता करेगी। केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में ‘केन्द्रीय बजट 2024-25’ पेश करते हुए कहा कि इस साल डीपीआई का उपयोग करते हुए खरीफ फसलों का 400 जिलों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 6 करोड़ किसानों और उनकी जमीन के ब्यौरों को किसान और जमीन की रजिस्ट्री में दर्ज किया जाएगा। श्रीमती सीतारमण ने यह भी कहा कि पांच राज्यों में जन समर्थ आधारित किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएंगे।
दलहन और तिलहन मिशन
दलहनों और तिलहनों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए सरकार इन फसलों के उत्पादन, भंडारण और विपणनन को मजबूत बनाएगी। आज संसद में केन्द्रीय बजट 2024-25 पेश करते हुए केन्द्रीय मंत्री श्रीमती सीतारमण ने बताया कि सरसों, मूंगफली, तिल, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी तिलहनों में‘आत्मनिर्भरता’हासिल करने के लिए एक कार्यनीति बनाई जा रही है, जैसा कि अंतरिम बजट में घोषणा की गई थी।
राष्ट्रीय सहकारिता नीति
सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए सरकार राष्ट्रीय सहकारिता नीति लाएगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था का तेजी से विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसरों का सृजन नीतिगत लक्ष्य होगा। सरकार झींगा पालन और विपणन के लिए वित्त उपलब्ध कराएगी।
सब्जी उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला
वित्त मंत्री ने बताया कि प्रमुख उपभोक्ता केंद्रों के नजदीक सब्जी उत्पादन केन्द्रों की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार उपज के संग्रहण, भंडारण और विपणन सहित सब्जी आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए किसान-उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों और स्टार्ट-अप को बढ़ावा देगी।
प्राकृतिक खेती पर जोर
कृषि और संबद्ध क्षेत्र के लिए कुल 1.52 लाख करोड़ रुपये के बजट आवंटन की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा अगले दो वर्षों में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती शुरू करने में मदद दी जाएगी। इस पहल को वैज्ञानिक संस्थानों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से धरातल पर उतारा जाएगा। इसके लिए 10 हजार बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
झींगा उत्पादन और निर्यात
केन्द्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि झींगा ब्रूड-स्टॉक्स न्यूक्लियस ब्रीडिंग केंद्रों का नेटवर्क स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि झींगा पालन, उनके प्रसंस्करण और निर्यात के लिए नाबार्ड के माध्यम से वित्तपोषण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
किसान नेताओं ने कहा – बजट के बारे में विभिन्न किसान नेताओं की टेलीफोनिक प्रतिक्रिया किसान नेताओं ने कहा कि बजट ने किसानों को “खाली हाथ” छोड़ दिया है। इसमें न तो एमएसपी गारंटी कानून का जिक्र है और न ही किसानों की कर्जमाफी का। कुल 48 लाख करोड़ रुपये के बजट में देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसानों के हिस्से में सिर्फ 1.52 लाख करोड़ रुपये आये. देश की 65 प्रतिशत आबादी केवल 3 प्रतिशत बजट तक सीमित थी यह ग्रामीण भारत के प्रति सबसे बड़ा भेदभाव है। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जलवायु अनुकूल किस्मों और उत्पादकता बढ़ाने के नाम पर बड़े कॉरपोरेट को खेती में लाना चाहती है। सभी को उम्मीद थी कि चुनाव में किसानों ने जो गुस्सा दिखाया है, उसे स्वीकार किया जाएगा. लेकिन बजट ने किसानों को निराश किया है. साथ ही, यह भी डर है कि वास्तविक किसान कृषि के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) योजना से वंचित रह जाएंगे। बजट में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि अब तक कितने एफपीओ का गठन हुआ है और एफपीओ से किसानों को कितना लाभ मिला है। हां, मोदी सरकार ने सत्ता के अपने “समर्थन” की कीमत जरूर चुकाई है।